मेरी कविताएं

शब्दों का ताना-बाना

कविता संसार

  • वृक्ष छाल-पत्रों का संकलन—

    वृक्ष छाल-पत्रों का संकलन,पुष्प-पत्रों के रंग से अंकन,खग-पंख से लेखन,हुआ पाण्डुलिपियों का वंचन,वेदोपनिषद और पुराणों का संकलन,पाठशाला में शिष्यों का वाचन-मंचन,तक्षशिला से चला उच्च शिक्षा का अभियान,प्रबुद्ध भारत का युग महान,सोलह महाजनपदों का स्रोत-सूत्र,अंगुत्तर निकाय और भगवती सूत्र,मगध कोसल वत्स और अवन्तिकानवीन धर्म प्रवर्तकों का युगोत्थानबौधगया और मृगदावन से ज्ञनोत्थानकेन्द्रित ज्ञानकुंज,वर्धमान और सिद्धार्थ का प्रकाश…

  • समय के साथ—-

    समय के साथ,आगे बढ़ता मानव और सशक्त हुआ,गुहा की प्राचीर और छीनी-हथौड़ा,राजाज्ञा से गोदे गये अक्षर,राजनीतिक आचार-विचार,शिलाएं और स्तम्भ से हुआ प्रचार,स्थिर और टिकाऊ सूचना-सार,तेज हवा, अभितृप्त ताप की मार,मौसमी मेघ और जलवायु परिवर्तन का प्रहार,इतिहास के अज्ञानी युग पर अमिट लेखनी का हार,राजाज्ञा के संदेश,धम्म स्तम्भ, विकेन्द्रित ज्ञान तत्व,स्वतंत्र भारत का अभिमानी पुरातत्व।शिलाएं और…

  • एक समय था जब लेखनी हेतु-

    एक समय था जब लेखनी हेतु,पेड़-पौधे व पशु-पक्षी पर निर्भर थे,स्याही का रंग प्राकृतिक,आरंभिक समय में तो गुहा प्राचीर,पुस्तक के पृष्ठ हुआ करते थे,सब कुछ प्राकृतिक,मानव भी प्राकृतिक,गुहा के अंतस में उकेरी रेखायें,कुछ विशेष ज्यामितीय,पशु-पक्षी के आरेख,आखेट करना ही हम समझ पाये।समय का चक्र घूमता,सिंधु-सरस्वती की नगरीय सभ्यता,ग्रामीण परिवेश से निकली हड़प्पा की भभ्यता,चित्राकार लिपि…