मेरी कविताएं

शब्दों का ताना-बाना

कविता संसार

  • निर्मल झरना जैसा बहता बालपन

    निर्मल झरना जैसा बहता बालपन,कोमल तन में ठहरता अबोध मन,उड़ान भरता निर्भय मधुर बालपन,रंग-विरंगे पंख पकड़ता हर्षित मन,थोड़ा बहुत हाथ-पैर चलाने का प्रयास,तितलियों संग उड़ान भरने का उल्लास,अधीरता को पकड़े अनचाहा लड़कपनस्वयं सें कुछ विचारने लगा अक्रांत-मन,उलझनों में सिंहरने लगा मेरा तन-मनआया चंचलता का सुकुमार किशोरपन,विचारों में देश-समाज की आँच,प्रेरित युवा-जीवन की राह साँच,श्रृंगारित मधुवन…

  • मानव और भूमि का समन्वयकारी गठबंधन

    मानव और भूमि का समन्वयकारी गठबंधन,भाषा-नस्ल और रंग का समुच्चयकारी महाजन।बाहुबल राष्ट्र निर्माण का सशक्त संसाधन,उकेरी गई रेखाओं का बहुभुज वंचन।युग-युग में राष्ट्राकृति में परिवर्तन,बाहुबल का सदैव शक्ति प्रदर्शन।राष्ट्र तार-बाड़ प्राचीरों का सशक्त बंधन,जन-धन सुरक्षा ही परम राष्ट्रीय मंथन,महाशक्ति का संसार में अभिनंदन,युद्धाशांति ही अतीत का मनोरंजन,

  • राष्ट्र का अभिमान

    राष्ट्र का अभिमान,नागरिक का स्वाभिमान,राष्ट्र का उत्थान,युवा-शक्ति का शिखरोन्न्यन,राष्ट्र का उन्नति,नारी-शक्ति की प्रगति,राष्ट्र निर्माण की आहुति,जन-जन की कर्म सुमति,जन-गण की सुगति-सुमति का सार,भारत राष्ट्र तेरे आत्म का प्रचार-प्रसारराष्ट्र का वैश्विक ध्येय ‘वसुधैव कुटम्बकम’राष्ट्र का मानवीय भाव ‘सर्वे भवन्तु सुखिनः’राष्ट्र का सेवाभाव ‘अतिथि देवो भव’राष्ट्र का राष्टीयता भाव ‘सत्यमेव जयते’राष्ट्र का चेतना भाव ‘वन्देमातरम्’राष्ट्र का सूक्ष्म…

  • धीरे-धीरे जीर्ण होते नगर

    धीरे-धीरे जीर्ण होते नगर,कुछ तो पांच हजार बरस पहले दफन हुए,हड़प्पा-मोहनजोदड़ो,कालीबंगा-आलमगीरपुर,लोथल और धौलवीरा,खुदाई के जुदाई नगर,प्राचीन सभ्यता के नगर।रोटी कपड़ा और मकान,कुएँ-नाली सड़क,अन्नागार,स्नानागार,खिलौने-मूर्तियां और मुहर,चूड़ियां-मनकों के नगरधीरे-धीरे जीर्ण होते नगर।

  • स्वर्ण युग की गाथाएं

    स्वर्ण युग की गाथाएं,चन्द्र-समुद्र की गुप्त धाराएंविक्रमादित्य और कुमार-स्कन्द,गुप्त वंश के ये पांच महान मकरन्दप्रयाग प्रशस्ति,समुद्र की महासागर स्तुति,कर्तृपुर-नेपाल और कामरूप का विजेता,उत्तरापथ-दक्षिणापथ ने स्वीकारी अधीनता।कला-साहित्य और ज्ञान विज्ञान में उन्नत,संस्कृत पंक्ति का हुआ एक शब्द में प्रोन्नत,पृथ्वी की सूर्य-परिक्रमा,दाशमिक पद्धति का अनुप्रयोग,गूढ़ रहस्य बतलाते महान गणितज्ञ आर्यभट्ट।फाह्यान,एक चीनी बौद्ध भिक्षु,शांति का पाठ सीखने,भारत पहुँचा।लड़ाकू…

  • पाटलिपुत्र अब पुराना नगर

    पाटलिपुत्र अब पुराना नगर,कन्नौज इत्र का नगर,उत्तर भारत का केन्द्रिय नगर,हर्ष और ह्वेनसांग,एक सम्राट और दूसरा भिक्षु चारणदोनो ने किया बौद्ध धर्म का उच्चारण।समकालीन,पश्चिम में धर्म मुहम्मद,जेहाद का पहला प्रचारक,प्रयाग में धर्म संसद,मक्का के आगे पारसियों पर धर्म संकट।मक्का से मदीना,कन्नौज के प्रयाग,दो विपरित धर्म राज्यों का आरम्भ काल,भारत में राजपूत,फारस में खलीफा-राज।अग्नि-कुण्ड से उत्पन्न,चार…