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वीर सैनिक की वीरत्व स्तुति
वीर सैनिक की वीरत्व स्तुति….हे वीर सैनिक,लेखनी से,क्या शेष लिखने को इतिहास ?मातृ भूमि के भाल पर,कोटि-कोटि भारतीयों के आत्म-पट्ट पर,वीरत्व की सशक्त लेखनी से,राष्ट्र-प्रेम के अंतरंग से,लिख दिया चिर-स्मरणीय इतिहास,हे! वीर योद्धा….राष्ट्र-धर्म पथ पर तेरा दिव्य साहस,न पाटी,न काष्ठ-पट्ट,न धातु-पट्ट,अमर बलिदानी इतिहास,लिख दियाहिमगिरि के ढालों पर,सीधे चट्टानों पर,मरूभूमि के तप्त टीलों पर,जलधि के तीव्र…
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वीर सैनिक की स्तुति
वीर सैनिक की स्तुतिहे ! वीर योद्धा…..रण-भूमि में अस्त्र-शस्त्रों की चमकयुद्धोद्घोष की ज्वाला गई धधक,वीरत्व से ओत-प्रोत नयनों की ललक,हृदय स्पंदन की तेज धड़क,भुजाओं में बलोन्नत धीर फड़कदेश-प्रेम की बलिदानी सड़कवीरत्व की अमरत्व जलधिप्राणां की महामोक्ष-समाधि,जीवन तृष्णा की यज्ञाहुति,सृजन राष्ट्र सेवा की भभूतिराष्ट्र सेवा का नागा तर्पणकर दो प्राणत्व का अर्पणराष्ट्र-प्रण का अमर कुण्डत्याग दो…
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एक समय वो भी था
एक समय वो भी था,जब बच्चों के लिए स्कूल न थे,किशोर-बालक का बचपन, खेल-कूद, कथा-ऐंणों में गुजरता था।खेल-कूद का मतलब क्रिकेट-हॉकी न था,तब इलेक्ट्रॉनिक,मोबाइल-कम्प्यूटर के खेल न थे,बाघ-बकरी,मुर्गा-झपट,अड्डू-पिड्डू,लुकाछिपी का खेल,पट्टांगण,खलिहान,सीड़ीदार खेतों,उड्यारों और औखलागारों में खेला करते थे।तिमूल के रूख में पकड़ा-पकड़ो,और सावन में झूला झूलते थे।जब कॉमिक्स,दूरदर्शन और कार्टून चैनल न थे,किशोर-बालक,गोलू-गंगनाथ,हरू-सैम,राजुला-मालुशाही,घंघू रमैला और अजेण्डी देवता…
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प्रसन्नता के निर्भय बालपन में-
प्रसन्नता के निर्भय बालपन में-झरने जैसा बहता क्षणिक ठहरता,हवाओं जैसा बहता क्षणिक ठहरताअंतस में केवल एक नन्हा संसार,जीवन पुहुप का एक सुन्दर प्रकारलघु अंग चलाने को सश्रम प्रयत्न,जीवन रंग में घुलने को अथक यत्न,झरने को आतुर जैसे पुहुप पुमंग,तितलियों के संग उड़ने की उमंग।चंचल सुकुमार के किशोरपन में-अपने बारे में कुछ समझने-सोचने लगा,क्या भला क्या…
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नदी और तट
नदी और तटदो प्रकार के संबंध-पटअतरंग,तट की थपकियां को आतुर,तरंग,तट को तोड़ने को चातुर,तरंगिणीदो तटों का भीतरी योगसेतुदो तटों का वाह्य योग़,लम्बी सरिता,अधिक सेतु,तटों का सघन योग,लघु वाहिनी,कम सेतुतटों का विरल योग,संकरी सलिला,लघु सेतु,तटों का सन्निध्य योग,विशाल तरंगिनी,लम्बा सेतु,तटों का सदूर योग,नदी का आकार,सेतु के प्रकार,कच्चे सेतु,पक्के सेतु,लघु सेतु,विशाल सेतु,कार्य हेतु एक ही,दो तटों का…
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बूँद-बूँद जल
बूँद-बूँद जल,पर्वतों से फूटता,पत्थरों से छितरता,गधेरों को पकड़,लघु धाराओं जाल मकड़,असंख्य धाराओं को एक दिशा में मोड़,लघु सरिता में रूपान्तरित होने की होड़घाटियों में नदी तल को रगड़ती,विक्टरी चिह्नाकृति बनाती,माटि-कंकड़ संग मैला आँचल,दो पाटों मध्य बहता शीतल जल।बूँद-बूँद जल,अभ्र से फूटता-छितरता,नभ से धरा-नेत्रों में उतरता,ढलान पथ को पकड़,अंत में नदी से जकड़,मैदानों की गजगामिनी,सर्पिल चिह्नाकृति…

