# मेरी कविताएं > शब्दों का ताना-बाना ## Posts - [वीर सैनिक की वीरत्व स्तुति](https://sanmafo.com/%e0%a4%b5%e0%a5%80%e0%a4%b0-%e0%a4%b8%e0%a5%88%e0%a4%a8%e0%a4%bf%e0%a4%95-%e0%a4%95%e0%a5%80-%e0%a4%b5%e0%a5%80%e0%a4%b0%e0%a4%a4%e0%a5%8d%e0%a4%b5-%e0%a4%b8%e0%a5%8d%e0%a4%a4%e0%a5%81%e0%a4%a4/): वीर सैनिक की वीरत्व स्तुति….हे वीर सैनिक,लेखनी से,क्या शेष लिखने को इतिहास ?मातृ भूमि के भाल पर,कोटि-कोटि भारतीयों के आत्म-पट्ट पर,वीरत्व की सशक्त लेखनी से,राष्ट्र-प्रेम के अंतरंग से,लिख दिया चिर-स्मरणीय इतिहास,हे! वीर योद्धा….राष्ट्र-धर्म पथ पर तेरा दिव्य साहस,न पाटी,न काष्ठ-पट्ट,न धातु-पट्ट,अमर बलिदानी इतिहास,लिख दियाहिमगिरि के ढालों पर,सीधे चट्टानों पर,मरूभूमि के तप्त टीलों पर,जलधि के तीव्र तरंगों पर,इन्द्र धनुष के छटाओं पर,घन कुंज के घटाओं पर,अरण्य के सघन छांव पर,सरिता की कल-कल धार पर,राजपथ-जनपथ के दिव्य पथ पर,और देश-विदेश के कपाल परलिख दिया चिर-स्मरणीय इतिहास,हे वीर योद्धा…..राष्ट्र-भक्ति पथ पर तेरा अद्भुत साहस। - [वीर सैनिक की स्तुति](https://sanmafo.com/%e0%a4%b5%e0%a5%80%e0%a4%b0-%e0%a4%b8%e0%a5%88%e0%a4%a8%e0%a4%bf%e0%a4%95-%e0%a4%95%e0%a5%80-%e0%a4%b8%e0%a5%8d%e0%a4%a4%e0%a5%81%e0%a4%a4%e0%a4%bf/): वीर सैनिक की स्तुतिहे ! वीर योद्धा…..रण-भूमि में अस्त्र-शस्त्रों की चमकयुद्धोद्घोष की ज्वाला गई धधक,वीरत्व से ओत-प्रोत नयनों की ललक,हृदय स्पंदन की तेज धड़क,भुजाओं में बलोन्नत धीर फड़कदेश-प्रेम की बलिदानी सड़कवीरत्व की अमरत्व जलधिप्राणां की महामोक्ष-समाधि,जीवन तृष्णा की यज्ञाहुति,सृजन राष्ट्र सेवा की भभूतिराष्ट्र सेवा का नागा तर्पणकर दो प्राणत्व का अर्पणराष्ट्र-प्रण का अमर कुण्डत्याग दो वेदना का कुण्डराष्ट्र-भक्ति का कुमकुम चंदनरक्त कणों से माट्याभिनंदनभोर-बेला की लालिमा वंदनशीश चढ़ा दो बसुन्धरा नंदन।हे ! वीर योद्धा…..प्राणों का एक-एक क्षण,अमरत्व का अतृप्त मन,माटि के सुगंधित कण,अंतस में जीवन-मृत्यु का रण,बाहर रक्त की होली का रंग,बलिदानी देश-प्रेम अंतरंग,अस्त्र-शस्त्रों की पूजा-वंदन,वीरत्व का मटि चंदन,पराक्रम का... - [एक समय वो भी था](https://sanmafo.com/%e0%a4%8f%e0%a4%95-%e0%a4%b8%e0%a4%ae%e0%a4%af-%e0%a4%b5%e0%a5%8b-%e0%a4%ad%e0%a5%80-%e0%a4%a5%e0%a4%be/): एक समय वो भी था,जब बच्चों के लिए स्कूल न थे,किशोर-बालक का बचपन,        खेल-कूद, कथा-ऐंणों में गुजरता था।खेल-कूद का मतलब क्रिकेट-हॉकी न था,तब इलेक्ट्रॉनिक,मोबाइल-कम्प्यूटर के खेल न थे,बाघ-बकरी,मुर्गा-झपट,अड्डू-पिड्डू,लुकाछिपी का खेल,पट्टांगण,खलिहान,सीड़ीदार खेतों,उड्यारों और औखलागारों में खेला करते थे।तिमूल के रूख में पकड़ा-पकड़ो,और सावन में झूला झूलते थे।जब कॉमिक्स,दूरदर्शन और कार्टून चैनल न थे,किशोर-बालक,गोलू-गंगनाथ,हरू-सैम,राजुला-मालुशाही,घंघू रमैला और अजेण्डी देवता की कहानियां,दादा-दादी के साथ बैठ सुना करते थे।रात्रिभोज के बाद,चूह्ले की ताप पर ऐंणों में बचपन खिलता था।एक समय वो भी था,जब बच्चों के लिए बाजारू फास्ट फूड न थे।जब खाने को,दो मिनट की मैगी,चाउमिन, मोमो,बर्गर-पिज्जा न थे,किशोर-बालक,खज्जी चावल,नमकीन-मीठी साई,पिनालू-गीठे के गुटके,नींबू का सन्ना,ककड़ी के... - [प्रसन्नता के निर्भय बालपन में-](https://sanmafo.com/%e0%a4%aa%e0%a5%8d%e0%a4%b0%e0%a4%b8%e0%a4%a8%e0%a5%8d%e0%a4%a8%e0%a4%a4%e0%a4%be-%e0%a4%95%e0%a5%87-%e0%a4%a8%e0%a4%bf%e0%a4%b0%e0%a5%8d%e0%a4%ad%e0%a4%af-%e0%a4%ac%e0%a4%be%e0%a4%b2%e0%a4%aa/): प्रसन्नता के निर्भय बालपन में-झरने जैसा बहता क्षणिक ठहरता,हवाओं जैसा बहता क्षणिक ठहरताअंतस में केवल एक नन्हा संसार,जीवन पुहुप का एक सुन्दर प्रकारलघु अंग चलाने को सश्रम प्रयत्न,जीवन रंग में घुलने को अथक यत्न,झरने को आतुर जैसे पुहुप पुमंग,तितलियों के संग उड़ने की उमंग।चंचल सुकुमार के किशोरपन में-अपने बारे में कुछ समझने-सोचने लगा,क्या भला क्या बुरा मुझे समझाया गया,तन-मन मेरा उलझनों में सिंहरने लगा,वो या ये करू अंतस में होने द्वंद्व लगा,चितावेश अपनी परिसीमा को स्पर्श करता,उत्साह से ओत-प्रोत मन नई उड़ान भरता।श्रृंगारित मधुवन यौवन में-युवावेश की प्रचण्ड पुकारघन-तिमिर का करूँ संहार,कायात्मा की एक ही पुकार,जीवन ओढ़े बलिदानी संस्कार,अंतस में... - [नदी और तट](https://sanmafo.com/%e0%a4%a8%e0%a4%a6%e0%a5%80-%e0%a4%94%e0%a4%b0-%e0%a4%a4%e0%a4%9f/): नदी और तटदो प्रकार के संबंध-पटअतरंग,तट की थपकियां को आतुर,तरंग,तट को तोड़ने को चातुर,तरंगिणीदो तटों का भीतरी योगसेतुदो तटों का वाह्य योग़,लम्बी सरिता,अधिक सेतु,तटों का सघन योग,लघु वाहिनी,कम सेतुतटों का विरल योग,संकरी सलिला,लघु सेतु,तटों का सन्निध्य योग,विशाल तरंगिनी,लम्बा सेतु,तटों का सदूर योग,नदी का आकार,सेतु के प्रकार,कच्चे सेतु,पक्के सेतु,लघु सेतु,विशाल सेतु,कार्य हेतु एक ही,दो तटों का सतही योग। - [बूँद-बूँद जल](https://sanmafo.com/%e0%a4%ac%e0%a5%82%e0%a4%81%e0%a4%a6-%e0%a4%ac%e0%a5%82%e0%a4%81%e0%a4%a6-%e0%a4%9c%e0%a4%b2/): बूँद-बूँद जल,पर्वतों से फूटता,पत्थरों से छितरता,गधेरों को पकड़,लघु धाराओं जाल मकड़,असंख्य धाराओं को एक दिशा में मोड़,लघु सरिता में रूपान्तरित होने की होड़घाटियों में नदी तल को रगड़ती,विक्टरी चिह्नाकृति बनाती,माटि-कंकड़ संग मैला आँचल,दो पाटों मध्य बहता शीतल जल।बूँद-बूँद जल,अभ्र से फूटता-छितरता,नभ से धरा-नेत्रों में उतरता,ढलान पथ को पकड़,अंत में नदी से जकड़,मैदानों की गजगामिनी,सर्पिल चिह्नाकृति बनाती,अवशिष्टों को नित किनारे छोड़,जलोढ़-बांगड़ का चापाकार मोड़,समतल की सरिता,प्रयागों की विशाल धारिता,समुद्र तट पर पुनः धाराओं में बिखरती,डेल्टा चिह्नाकृति बनाती,जलधि में स्वयं लेती महान समाधि,जैसे आत्मा-परमात्मा की अतृप्त सुधि। - [निर्मल झरना जैसा बहता बालपन](https://sanmafo.com/%e0%a4%a8%e0%a4%bf%e0%a4%b0%e0%a5%8d%e0%a4%ae%e0%a4%b2-%e0%a4%9d%e0%a4%b0%e0%a4%a8%e0%a4%be-%e0%a4%9c%e0%a5%88%e0%a4%b8%e0%a4%be-%e0%a4%ac%e0%a4%b9%e0%a4%a4%e0%a4%be-%e0%a4%ac%e0%a4%be%e0%a4%b2/): निर्मल झरना जैसा बहता बालपन,कोमल तन में ठहरता अबोध मन,उड़ान भरता निर्भय मधुर बालपन,रंग-विरंगे पंख पकड़ता हर्षित मन,थोड़ा बहुत हाथ-पैर चलाने का प्रयास,तितलियों संग उड़ान भरने का उल्लास,अधीरता को पकड़े अनचाहा लड़कपनस्वयं सें कुछ विचारने लगा अक्रांत-मन,उलझनों में सिंहरने लगा मेरा तन-मनआया चंचलता का सुकुमार किशोरपन,विचारों में देश-समाज की आँच,प्रेरित युवा-जीवन की राह साँच,श्रृंगारित मधुवन यौवन की सांझ,यौवन का जीवन चमकीला कांच,हवाओं में जीवन-क्रांति का शोर,पग-पग पर मन नाचे जैसे मोर,कस्तूरी मृग जैसे ढूँढे चित-चोर,उमड़ते प्रश्नों की वर्षा घन-घोरमुझे ले गया देश सेवा की ओर,कायात्मा की हुई सुनहरी भोर,मन के पतंग की सुलझी डोर,जीवन पथ पर नित नवल होर,बलिदान आत्मा... - [मानव और भूमि का समन्वयकारी गठबंधन](https://sanmafo.com/%e0%a4%ae%e0%a4%be%e0%a4%a8%e0%a4%b5-%e0%a4%94%e0%a4%b0-%e0%a4%ad%e0%a5%82%e0%a4%ae%e0%a4%bf-%e0%a4%95%e0%a4%be-%e0%a4%b8%e0%a4%ae%e0%a4%a8%e0%a5%8d%e0%a4%b5%e0%a4%af%e0%a4%95%e0%a4%be%e0%a4%b0/): मानव और भूमि का समन्वयकारी गठबंधन,भाषा-नस्ल और रंग का समुच्चयकारी महाजन।बाहुबल राष्ट्र निर्माण का सशक्त संसाधन,उकेरी गई रेखाओं का बहुभुज वंचन।युग-युग में राष्ट्राकृति में परिवर्तन,बाहुबल का सदैव शक्ति प्रदर्शन।राष्ट्र तार-बाड़ प्राचीरों का सशक्त बंधन,जन-धन सुरक्षा ही परम राष्ट्रीय मंथन,महाशक्ति का संसार में अभिनंदन,युद्धाशांति ही अतीत का मनोरंजन, - [राष्ट्र का अभिमान](https://sanmafo.com/%e0%a4%b0%e0%a4%be%e0%a4%b7%e0%a5%8d%e0%a4%9f%e0%a5%8d%e0%a4%b0-%e0%a4%95%e0%a4%be-%e0%a4%85%e0%a4%ad%e0%a4%bf%e0%a4%ae%e0%a4%be%e0%a4%a8/): राष्ट्र का अभिमान,नागरिक का स्वाभिमान,राष्ट्र का उत्थान,युवा-शक्ति का शिखरोन्न्यन,राष्ट्र का उन्नति,नारी-शक्ति की प्रगति,राष्ट्र निर्माण की आहुति,जन-जन की कर्म सुमति,जन-गण की सुगति-सुमति का सार,भारत राष्ट्र तेरे आत्म का प्रचार-प्रसारराष्ट्र का वैश्विक ध्येय ‘वसुधैव कुटम्बकम’राष्ट्र का मानवीय भाव ‘सर्वे भवन्तु सुखिनः’राष्ट्र का सेवाभाव ‘अतिथि देवो भव’राष्ट्र का राष्टीयता भाव ‘सत्यमेव जयते’राष्ट्र का चेतना भाव ‘वन्देमातरम्’राष्ट्र का सूक्ष्म चित्त भाव ‘अहिंसा परमो धर्मः’राष्ट्र का नारीत्व भाव ‘यत्र नार्यस्तु पूज्यन्ते, रमन्ते तत्र देवता’राष्ट्र का वीरत्व भाव ‘वीर भोग्या वसुंधरा’ - [धीरे-धीरे जीर्ण होते नगर](https://sanmafo.com/%e0%a4%a7%e0%a5%80%e0%a4%b0%e0%a5%87-%e0%a4%a7%e0%a5%80%e0%a4%b0%e0%a5%87-%e0%a4%9c%e0%a5%80%e0%a4%b0%e0%a5%8d%e0%a4%a3-%e0%a4%b9%e0%a5%8b%e0%a4%a4%e0%a5%87-%e0%a4%a8%e0%a4%97%e0%a4%b0/): धीरे-धीरे जीर्ण होते नगर,कुछ तो पांच हजार बरस पहले दफन हुए,हड़प्पा-मोहनजोदड़ो,कालीबंगा-आलमगीरपुर,लोथल और धौलवीरा,खुदाई के जुदाई नगर,प्राचीन सभ्यता के नगर।रोटी कपड़ा और मकान,कुएँ-नाली सड़क,अन्नागार,स्नानागार,खिलौने-मूर्तियां और मुहर,चूड़ियां-मनकों के नगरधीरे-धीरे जीर्ण होते नगर। - [स्वर्ण युग की गाथाएं](https://sanmafo.com/%e0%a4%b8%e0%a5%8d%e0%a4%b5%e0%a4%b0%e0%a5%8d%e0%a4%a3-%e0%a4%af%e0%a5%81%e0%a4%97-%e0%a4%95%e0%a5%80-%e0%a4%97%e0%a4%be%e0%a4%a5%e0%a4%be%e0%a4%8f%e0%a4%82/): स्वर्ण युग की गाथाएं,चन्द्र-समुद्र की गुप्त धाराएंविक्रमादित्य और कुमार-स्कन्द,गुप्त वंश के ये पांच महान मकरन्दप्रयाग प्रशस्ति,समुद्र की महासागर स्तुति,कर्तृपुर-नेपाल और कामरूप का विजेता,उत्तरापथ-दक्षिणापथ ने स्वीकारी अधीनता।कला-साहित्य और ज्ञान विज्ञान में उन्नत,संस्कृत पंक्ति का हुआ एक शब्द में प्रोन्नत,पृथ्वी की सूर्य-परिक्रमा,दाशमिक पद्धति का अनुप्रयोग,गूढ़ रहस्य बतलाते महान गणितज्ञ आर्यभट्ट।फाह्यान,एक चीनी बौद्ध भिक्षु,शांति का पाठ सीखने,भारत पहुँचा।लड़ाकू यवन-हूण,हिंद विजय को पाटलिपुत्र आ धमके,बिना आहट के,सहजता से,विदेशी यवन-कुषाण लड़ाके,विशाल हिन्दुत्व सागर में विलीन। - [पाटलिपुत्र अब पुराना नगर](https://sanmafo.com/%e0%a4%aa%e0%a4%be%e0%a4%9f%e0%a4%b2%e0%a4%bf%e0%a4%aa%e0%a5%81%e0%a4%a4%e0%a5%8d%e0%a4%b0-%e0%a4%85%e0%a4%ac-%e0%a4%aa%e0%a5%81%e0%a4%b0%e0%a4%be%e0%a4%a8%e0%a4%be-%e0%a4%a8%e0%a4%97%e0%a4%b0/): पाटलिपुत्र अब पुराना नगर,कन्नौज इत्र का नगर,उत्तर भारत का केन्द्रिय नगर,हर्ष और ह्वेनसांग,एक सम्राट और दूसरा भिक्षु चारणदोनो ने किया बौद्ध धर्म का उच्चारण।समकालीन,पश्चिम में धर्म मुहम्मद,जेहाद का पहला प्रचारक,प्रयाग में धर्म संसद,मक्का के आगे पारसियों पर धर्म संकट।मक्का से मदीना,कन्नौज के प्रयाग,दो विपरित धर्म राज्यों का आरम्भ काल,भारत में राजपूत,फारस में खलीफा-राज।अग्नि-कुण्ड से उत्पन्न,चार राजपूत कुल,चौहान-प्रतिहार और सोलंकी-चंदेल।विन्ध्याचल और समुद्र मध्य,दक्षिण में अनेक राज्यों का घेर,पल्लव-पाड्य, राष्ट्रकूट और चोल-चेर।छोटे-छोटे राज्य और राजा,अखण्ड भारत का शून्य आकाश,शून्य आकाश में एक तारा,केरल के कालड़ी गांव में जन्मा,बारह ज्योर्तिर लिंग,चार धाम के प्रणेता,हिन्दू धर्म के अखण्ड शंकराकारअखण्ड भारत के धर्म शिल्पकार,प्रछन्न बौद्ध... - [वृक्ष छाल-पत्रों का संकलन---](https://sanmafo.com/%e0%a4%b5%e0%a5%83%e0%a4%95%e0%a5%8d%e0%a4%b7-%e0%a4%9b%e0%a4%be%e0%a4%b2-%e0%a4%aa%e0%a4%a4%e0%a5%8d%e0%a4%b0%e0%a5%8b%e0%a4%82-%e0%a4%95%e0%a4%be-%e0%a4%b8%e0%a4%82%e0%a4%95%e0%a4%b2%e0%a4%a8/): वृक्ष छाल-पत्रों का संकलन,पुष्प-पत्रों के रंग से अंकन,खग-पंख से लेखन,हुआ पाण्डुलिपियों का वंचन,वेदोपनिषद और पुराणों का संकलन,पाठशाला में शिष्यों का वाचन-मंचन,तक्षशिला से चला उच्च शिक्षा का अभियान,प्रबुद्ध भारत का युग महान,सोलह महाजनपदों का स्रोत-सूत्र,अंगुत्तर निकाय और भगवती सूत्र,मगध कोसल वत्स और अवन्तिकानवीन धर्म प्रवर्तकों का युगोत्थानबौधगया और मृगदावन से ज्ञनोत्थानकेन्द्रित ज्ञानकुंज,वर्धमान और सिद्धार्थ का प्रकाश पुंज,वर्धमान-महावीर की कठोरता,सिद्धार्थ-गौतम बुद्ध की कोमलता,मठ-विहार नवीन आश्रम,सामाजिक आंदोलनों का अथक परिश्रम,राजगीरह से पाटलिपुत्र की राजपथ यात्रा,बिंदुसाराजातशत्रु से उदयन की जीबन जात्रावैशाली से मैसूरदिगम्बर और श्वेताम्बरकुशीनगर में बुद्ध की सद्गतिराजगृह, वैशाली, पाटलिपुत्र और कश्मीर तक बौद्ध संगति।हीनयान वामवर्तमहायान एशियायी लोक धर्म,कंधार और मथुरा शैली,गढ़ी बुद्ध... - [समय के साथ----](https://sanmafo.com/%e0%a4%b8%e0%a4%ae%e0%a4%af-%e0%a4%95%e0%a5%87-%e0%a4%b8%e0%a4%be%e0%a4%a5/): समय के साथ,आगे बढ़ता मानव और सशक्त हुआ,गुहा की प्राचीर और छीनी-हथौड़ा,राजाज्ञा से गोदे गये अक्षर,राजनीतिक आचार-विचार,शिलाएं और स्तम्भ से हुआ प्रचार,स्थिर और टिकाऊ सूचना-सार,तेज हवा, अभितृप्त ताप की मार,मौसमी मेघ और जलवायु परिवर्तन का प्रहार,इतिहास के अज्ञानी युग पर अमिट लेखनी का हार,राजाज्ञा के संदेश,धम्म स्तम्भ, विकेन्द्रित ज्ञान तत्व,स्वतंत्र भारत का अभिमानी पुरातत्व।शिलाएं और अशोक के लाट,स्थिर पुस्तकों के वाह्य पृष्ठ,कालसी से मास्की,कंधार से धौली,अखण्ड भारत का अमिट संदेश। - [एक समय था जब लेखनी हेतु-](https://sanmafo.com/%e0%a4%8f%e0%a4%95-%e0%a4%b8%e0%a4%ae%e0%a4%af-%e0%a4%a5%e0%a4%be-%e0%a4%9c%e0%a4%ac-%e0%a4%b2%e0%a5%87%e0%a4%96%e0%a4%a8%e0%a5%80-%e0%a4%b9%e0%a5%87%e0%a4%a4%e0%a5%81/): एक समय था जब लेखनी हेतु,पेड़-पौधे व पशु-पक्षी पर निर्भर थे,स्याही का रंग प्राकृतिक,आरंभिक समय में तो गुहा प्राचीर,पुस्तक के पृष्ठ हुआ करते थे,सब कुछ प्राकृतिक,मानव भी प्राकृतिक,गुहा के अंतस में उकेरी रेखायें,कुछ विशेष ज्यामितीय,पशु-पक्षी के आरेख,आखेट करना ही हम समझ पाये।समय का चक्र घूमता,सिंधु-सरस्वती की नगरीय सभ्यता,ग्रामीण परिवेश से निकली हड़प्पा की भभ्यता,चित्राकार लिपि के अक्षर,हमारे लिए अपठनीय चार सौ अक्षर,मानव अब न रहा निरक्षर,सरस्वती का प्रवाह तब था निझर,मिट्टी की मुहरों पर लिखावट,चित्रों की स्पष्ट बनावट,पाशुपत योगेश्वर की सजावट,हाथी, बाघ, गेंडा और भौंसा साथ बसावट,मोहन जोदड़ो का महास्नानागार,हड़प्पा के अन्नागार,लोथल की गोदीबाड़ा,और धौलवीरा का परकोटा।नगर स्थापत्य के दो... ## Pages - [डॉ. नरसिंह रावत](https://sanmafo.com/about/): मेरा परिचय एम.ए. अर्थशास्त्र, इतिहास, बी.टी.सी. बी.एड., नेट, पी-एच. डी. –इतिहास अभिरुचि– सीखो और सिखाओ। मेरा जीवन मैंने जो कुछ भी पाया अथक परिश्रम करके पाया। अद्यतन कविताएं - [कविताएं](https://sanmafo.com/blog/): शब्दों का ताना-बाना - [डॉ. नरसिंह रावत](https://sanmafo.com/): मेरी कविताएं Where words breathe and feelings flow. [comment]: # (Generated by Hostinger Tools Plugin)