मेरी कविताएं

शब्दों का ताना-बाना

Author: maitreyinarsingh@gmail.com

  • वीर सैनिक की वीरत्व स्तुति

    वीर सैनिक की वीरत्व स्तुति….हे वीर सैनिक,लेखनी से,क्या शेष लिखने को इतिहास ?मातृ भूमि के भाल पर,कोटि-कोटि भारतीयों के आत्म-पट्ट पर,वीरत्व की सशक्त लेखनी से,राष्ट्र-प्रेम के अंतरंग से,लिख दिया चिर-स्मरणीय इतिहास,हे! वीर योद्धा….राष्ट्र-धर्म पथ पर तेरा दिव्य साहस,न पाटी,न काष्ठ-पट्ट,न धातु-पट्ट,अमर बलिदानी इतिहास,लिख दियाहिमगिरि के ढालों पर,सीधे चट्टानों पर,मरूभूमि के तप्त टीलों पर,जलधि के तीव्र…

  • वीर सैनिक की स्तुति

    वीर सैनिक की स्तुतिहे ! वीर योद्धा…..रण-भूमि में अस्त्र-शस्त्रों की चमकयुद्धोद्घोष की ज्वाला गई धधक,वीरत्व से ओत-प्रोत नयनों की ललक,हृदय स्पंदन की तेज धड़क,भुजाओं में बलोन्नत धीर फड़कदेश-प्रेम की बलिदानी सड़कवीरत्व की अमरत्व जलधिप्राणां की महामोक्ष-समाधि,जीवन तृष्णा की यज्ञाहुति,सृजन राष्ट्र सेवा की भभूतिराष्ट्र सेवा का नागा तर्पणकर दो प्राणत्व का अर्पणराष्ट्र-प्रण का अमर कुण्डत्याग दो…

  • एक समय वो भी था

    एक समय वो भी था,जब बच्चों के लिए स्कूल न थे,किशोर-बालक का बचपन,        खेल-कूद, कथा-ऐंणों में गुजरता था।खेल-कूद का मतलब क्रिकेट-हॉकी न था,तब इलेक्ट्रॉनिक,मोबाइल-कम्प्यूटर के खेल न थे,बाघ-बकरी,मुर्गा-झपट,अड्डू-पिड्डू,लुकाछिपी का खेल,पट्टांगण,खलिहान,सीड़ीदार खेतों,उड्यारों और औखलागारों में खेला करते थे।तिमूल के रूख में पकड़ा-पकड़ो,और सावन में झूला झूलते थे।जब कॉमिक्स,दूरदर्शन और कार्टून चैनल न थे,किशोर-बालक,गोलू-गंगनाथ,हरू-सैम,राजुला-मालुशाही,घंघू रमैला और अजेण्डी देवता…

  • प्रसन्नता के निर्भय बालपन में-

    प्रसन्नता के निर्भय बालपन में-झरने जैसा बहता क्षणिक ठहरता,हवाओं जैसा बहता क्षणिक ठहरताअंतस में केवल एक नन्हा संसार,जीवन पुहुप का एक सुन्दर प्रकारलघु अंग चलाने को सश्रम प्रयत्न,जीवन रंग में घुलने को अथक यत्न,झरने को आतुर जैसे पुहुप पुमंग,तितलियों के संग उड़ने की उमंग।चंचल सुकुमार के किशोरपन में-अपने बारे में कुछ समझने-सोचने लगा,क्या भला क्या…

  • नदी और तट

    नदी और तटदो प्रकार के संबंध-पटअतरंग,तट की थपकियां को आतुर,तरंग,तट को तोड़ने को चातुर,तरंगिणीदो तटों का भीतरी योगसेतुदो तटों का वाह्य योग़,लम्बी सरिता,अधिक सेतु,तटों का सघन योग,लघु वाहिनी,कम सेतुतटों का विरल योग,संकरी सलिला,लघु सेतु,तटों का सन्निध्य योग,विशाल तरंगिनी,लम्बा सेतु,तटों का सदूर योग,नदी का आकार,सेतु के प्रकार,कच्चे सेतु,पक्के सेतु,लघु सेतु,विशाल सेतु,कार्य हेतु एक ही,दो तटों का…

  • बूँद-बूँद जल

    बूँद-बूँद जल,पर्वतों से फूटता,पत्थरों से छितरता,गधेरों को पकड़,लघु धाराओं जाल मकड़,असंख्य धाराओं को एक दिशा में मोड़,लघु सरिता में रूपान्तरित होने की होड़घाटियों में नदी तल को रगड़ती,विक्टरी चिह्नाकृति बनाती,माटि-कंकड़ संग मैला आँचल,दो पाटों मध्य बहता शीतल जल।बूँद-बूँद जल,अभ्र से फूटता-छितरता,नभ से धरा-नेत्रों में उतरता,ढलान पथ को पकड़,अंत में नदी से जकड़,मैदानों की गजगामिनी,सर्पिल चिह्नाकृति…

  • निर्मल झरना जैसा बहता बालपन

    निर्मल झरना जैसा बहता बालपन,कोमल तन में ठहरता अबोध मन,उड़ान भरता निर्भय मधुर बालपन,रंग-विरंगे पंख पकड़ता हर्षित मन,थोड़ा बहुत हाथ-पैर चलाने का प्रयास,तितलियों संग उड़ान भरने का उल्लास,अधीरता को पकड़े अनचाहा लड़कपनस्वयं सें कुछ विचारने लगा अक्रांत-मन,उलझनों में सिंहरने लगा मेरा तन-मनआया चंचलता का सुकुमार किशोरपन,विचारों में देश-समाज की आँच,प्रेरित युवा-जीवन की राह साँच,श्रृंगारित मधुवन…

  • मानव और भूमि का समन्वयकारी गठबंधन

    मानव और भूमि का समन्वयकारी गठबंधन,भाषा-नस्ल और रंग का समुच्चयकारी महाजन।बाहुबल राष्ट्र निर्माण का सशक्त संसाधन,उकेरी गई रेखाओं का बहुभुज वंचन।युग-युग में राष्ट्राकृति में परिवर्तन,बाहुबल का सदैव शक्ति प्रदर्शन।राष्ट्र तार-बाड़ प्राचीरों का सशक्त बंधन,जन-धन सुरक्षा ही परम राष्ट्रीय मंथन,महाशक्ति का संसार में अभिनंदन,युद्धाशांति ही अतीत का मनोरंजन,

  • राष्ट्र का अभिमान

    राष्ट्र का अभिमान,नागरिक का स्वाभिमान,राष्ट्र का उत्थान,युवा-शक्ति का शिखरोन्न्यन,राष्ट्र का उन्नति,नारी-शक्ति की प्रगति,राष्ट्र निर्माण की आहुति,जन-जन की कर्म सुमति,जन-गण की सुगति-सुमति का सार,भारत राष्ट्र तेरे आत्म का प्रचार-प्रसारराष्ट्र का वैश्विक ध्येय ‘वसुधैव कुटम्बकम’राष्ट्र का मानवीय भाव ‘सर्वे भवन्तु सुखिनः’राष्ट्र का सेवाभाव ‘अतिथि देवो भव’राष्ट्र का राष्टीयता भाव ‘सत्यमेव जयते’राष्ट्र का चेतना भाव ‘वन्देमातरम्’राष्ट्र का सूक्ष्म…

  • धीरे-धीरे जीर्ण होते नगर

    धीरे-धीरे जीर्ण होते नगर,कुछ तो पांच हजार बरस पहले दफन हुए,हड़प्पा-मोहनजोदड़ो,कालीबंगा-आलमगीरपुर,लोथल और धौलवीरा,खुदाई के जुदाई नगर,प्राचीन सभ्यता के नगर।रोटी कपड़ा और मकान,कुएँ-नाली सड़क,अन्नागार,स्नानागार,खिलौने-मूर्तियां और मुहर,चूड़ियां-मनकों के नगरधीरे-धीरे जीर्ण होते नगर।