मेरी कविताएं

शब्दों का ताना-बाना

धीरे-धीरे जीर्ण होते नगर

धीरे-धीरे जीर्ण होते नगर,
कुछ तो पांच हजार बरस पहले दफन हुए,
हड़प्पा-मोहनजोदड़ो,
कालीबंगा-आलमगीरपुर,
लोथल और धौलवीरा,
खुदाई के जुदाई नगर,
प्राचीन सभ्यता के नगर।
रोटी कपड़ा और मकान,
कुएँ-नाली सड़क,
अन्नागार,
स्नानागार,
खिलौने-मूर्तियां और मुहर,
चूड़ियां-मनकों के नगर
धीरे-धीरे जीर्ण होते नगर।

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