मेरी कविताएं

शब्दों का ताना-बाना

समय के साथ—-

समय के साथ,
आगे बढ़ता मानव और सशक्त हुआ,
गुहा की प्राचीर और छीनी-हथौड़ा,
राजाज्ञा से गोदे गये अक्षर,
राजनीतिक आचार-विचार,
शिलाएं और स्तम्भ से हुआ प्रचार,
स्थिर और टिकाऊ सूचना-सार,
तेज हवा, अभितृप्त ताप की मार,
मौसमी मेघ और जलवायु परिवर्तन का प्रहार,
इतिहास के अज्ञानी युग पर अमिट लेखनी का हार,
राजाज्ञा के संदेश,
धम्म स्तम्भ, विकेन्द्रित ज्ञान तत्व,
स्वतंत्र भारत का अभिमानी पुरातत्व।
शिलाएं और अशोक के लाट,
स्थिर पुस्तकों के वाह्य पृष्ठ,
कालसी से मास्की,
कंधार से धौली,
अखण्ड भारत का अमिट संदेश।

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