वीर सैनिक की स्तुति
हे ! वीर योद्धा…..
रण-भूमि में अस्त्र-शस्त्रों की चमक
युद्धोद्घोष की ज्वाला गई धधक,
वीरत्व से ओत-प्रोत नयनों की ललक,
हृदय स्पंदन की तेज धड़क,
भुजाओं में बलोन्नत धीर फड़क
देश-प्रेम की बलिदानी सड़क
वीरत्व की अमरत्व जलधि
प्राणां की महामोक्ष-समाधि,
जीवन तृष्णा की यज्ञाहुति,
सृजन राष्ट्र सेवा की भभूति
राष्ट्र सेवा का नागा तर्पण
कर दो प्राणत्व का अर्पण
राष्ट्र-प्रण का अमर कुण्ड
त्याग दो वेदना का कुण्ड
राष्ट्र-भक्ति का कुमकुम चंदन
रक्त कणों से माट्याभिनंदन
भोर-बेला की लालिमा वंदन
शीश चढ़ा दो बसुन्धरा नंदन।
हे ! वीर योद्धा…..
प्राणों का एक-एक क्षण,
अमरत्व का अतृप्त मन,
माटि के सुगंधित कण,
अंतस में जीवन-मृत्यु का रण,
बाहर रक्त की होली का रंग,
बलिदानी देश-प्रेम अंतरंग,
अस्त्र-शस्त्रों की पूजा-वंदन,
वीरत्व का मटि चंदन,
पराक्रम का अद्भुत नंदन,
राष्ट्र-प्रेम प्रतिज्ञा का अटूट बंधन,
माँ भारतीय का सर्वदा अभिनन्दन,
वीरत्व का सर्वोच्च देश-प्रेम वंदन।
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