मेरी कविताएं

शब्दों का ताना-बाना

वीर सैनिक की वीरत्व स्तुति

वीर सैनिक की वीरत्व स्तुति….
हे वीर सैनिक,
लेखनी से,
क्या शेष लिखने को इतिहास ?
मातृ भूमि के भाल पर,
कोटि-कोटि भारतीयों के आत्म-पट्ट पर,
वीरत्व की सशक्त लेखनी से,
राष्ट्र-प्रेम के अंतरंग से,
लिख दिया चिर-स्मरणीय इतिहास,
हे! वीर योद्धा….
राष्ट्र-धर्म पथ पर तेरा दिव्य साहस,
न पाटी,
न काष्ठ-पट्ट,
न धातु-पट्ट,
अमर बलिदानी इतिहास,
लिख दिया
हिमगिरि के ढालों पर,
सीधे चट्टानों पर,
मरूभूमि के तप्त टीलों पर,
जलधि के तीव्र तरंगों पर,
इन्द्र धनुष के छटाओं पर,
घन कुंज के घटाओं पर,
अरण्य के सघन छांव पर,
सरिता की कल-कल धार पर,
राजपथ-जनपथ के दिव्य पथ पर,
और देश-विदेश के कपाल पर
लिख दिया चिर-स्मरणीय इतिहास,
हे वीर योद्धा…..
राष्ट्र-भक्ति पथ पर तेरा अद्भुत साहस।

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