मानव और भूमि का समन्वयकारी गठबंधन,
भाषा-नस्ल और रंग का समुच्चयकारी महाजन।
बाहुबल राष्ट्र निर्माण का सशक्त संसाधन,
उकेरी गई रेखाओं का बहुभुज वंचन।
युग-युग में राष्ट्राकृति में परिवर्तन,
बाहुबल का सदैव शक्ति प्रदर्शन।
राष्ट्र तार-बाड़ प्राचीरों का सशक्त बंधन,
जन-धन सुरक्षा ही परम राष्ट्रीय मंथन,
महाशक्ति का संसार में अभिनंदन,
युद्धाशांति ही अतीत का मनोरंजन,
Leave a Reply