मेरी कविताएं

शब्दों का ताना-बाना

पाटलिपुत्र अब पुराना नगर

पाटलिपुत्र अब पुराना नगर,
कन्नौज इत्र का नगर,
उत्तर भारत का केन्द्रिय नगर,
हर्ष और ह्वेनसांग,
एक सम्राट और दूसरा भिक्षु चारण
दोनो ने किया बौद्ध धर्म का उच्चारण।
समकालीन,
पश्चिम में धर्म मुहम्मद,
जेहाद का पहला प्रचारक,
प्रयाग में धर्म संसद,
मक्का के आगे पारसियों पर धर्म संकट।
मक्का से मदीना,
कन्नौज के प्रयाग,
दो विपरित धर्म राज्यों का आरम्भ काल,
भारत में राजपूत,
फारस में खलीफा-राज।
अग्नि-कुण्ड से उत्पन्न,
चार राजपूत कुल,
चौहान-प्रतिहार और सोलंकी-चंदेल।
विन्ध्याचल और समुद्र मध्य,
दक्षिण में अनेक राज्यों का घेर,
पल्लव-पाड्य, राष्ट्रकूट और चोल-चेर।
छोटे-छोटे राज्य और राजा,
अखण्ड भारत का शून्य आकाश,
शून्य आकाश में एक तारा,
केरल के कालड़ी गांव में जन्मा,
बारह ज्योर्तिर लिंग,
चार धाम के प्रणेता,
हिन्दू धर्म के अखण्ड शंकराकार
अखण्ड भारत के धर्म शिल्पकार,
प्रछन्न बौद्ध के नये अवतार,
समाधिस्थ हुए गढ़ केदार।
शुरू हुआ,
कन्नौज का त्रिकोणीय संघर्ष,
आपस में उलझे,
दक्षिण के राष्ट्रकूट,
मध्य के प्रतिहार,
और पूरब के बंग-पाल।
बार-बार युद्ध और विनाश,
क्षणिक जीत और हार,
विजय के प्रतीक मंदिर तोरण-द्वार
उत्तर में नागर,
मध्य में बेसर,
द्रविड़ में ऊँचे-ऊँचे गोपुरम द्वार।

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